Jagadguru MahaBrahmrishi Shree Kumar Swami ji

पति-पत्नी के मधुर संबंधों का दैवीय उपाय

गुरुदास : परम पूज्य गुरुदेव, आजकल बहुत से रोग पति-पत्नी के बीच आपसी तनाव और इससे उपजे मानसिक दबाव के कारण हो रहे हैं आप कृपया शास्त्रों का कोई ऐसा रहस्य बताएं जो पति-पत्नी के बीच मधुर संबंध बनाने में अहम भूमिका निभाए।

परम पूज्य गुरुदेव : यह सम्पूर्ण विश्व का कल्याण करने वाला प्रश्न है। आज जिस तरह रोगों में जैसे शुगर, दमा, अर्थराइटिस आदि ने महामारी की तरह घेर रखा है, उनके मूल कारण में पति-पत्नी के तनाव का भी योगदान है। आज के जो शिक्षित वर्ग हैं वे अपने अधिकारों के लिए, बल के लिए, बुद्धि के लिए जितने झगड़े कर रहे हैं, उससे तनाव बढ़ता ही जाता है। क्योंकि उनकी शिक्षा उन्हें पतन की ओर ले जा रही है। कुछ लोग शिक्षा का सदुपयोग भी कर रहे हैं और अपना जीवन सुखी बना रहे हैं। अधिकतर देखने में आता है कि पति-पत्नी में जो प्रेम होना चाहिए, नहीं है।

हमारे पुराने बुजुर्ग जिनकी उम्र 70-80 साल हो गई, 100 साल हो गई उन्होंने तलाक के बारे में कभी कल्पना तक नहीं की, सोचा ही नहीं कि तलाक नाम की भी कोई चीज होती है। वृद्ध स्त्रियां कभी यह नहीं सोचती कि पति बेकार है, काम भी नहीं कर रहा है या अपाहिज है। वे कहती हैं ‘प्रभु कृपा करो मैं सात जन्म तक या हर जन्म में इस पति के साथ ही रहूं।’ यह कितनी आध्यात्मिक और दैवीय बात है। विदेशों में 90 प्रतिशत ऐसा नहीं है। वहां अगर कोई स्त्री देखती है कि यह पुरुष मेरे काम का नहीं है या मेरी बात नहीं मानता या पुरुष कहता है कि मेरी पत्नी मेरी आज्ञा नहीं मानती तो वहां तलाक हो जाता है। वहां स्त्री-पुरुषों को पता भी नहीं होता कि उनकी कितनी बार शादी हो चुकी है। लेकिन यहां भारतीय सभ्यता है। यहां की स्त्री ऐसा सोच भी नहीं सकती। इसके पीछे उनके माता-पिता का प्रभाव है, दैवीय गुण है, उनकी शिक्षा है, हमारे ऋषि-मुनियों की शिक्षा का प्रभाव है।

प्रभु कृपा से मैं एक मंत्र बता रहा हूं। अगर कोई पति-पत्नी इस मंत्र का प्रयोग करेगा तो उसके आपसी झगड़े शांत हो जाएंगे। अगर कोई पति-पत्नी पूजा पाठ नहीं कर रहा और सुखी है तो इसका मतलब है कि उसने पिछले जन्म में अवश्य ही तप किए हैं तभी इस जन्म में उन्हें अच्छी पत्नी या पति मिला।

अगर पति-पत्नी बच्चों को कुछ नहीं दे सकते तो कम से कम उनके सामने झगड़ा तो न करें क्योंकि ऐसा करने से बच्चों के ऊपर भी इसका असर पड़ता है और वे भी उसी तरह का आचरण करते हैं। ऐसे लोग कभी सुख-समृद्धि के साथ जीवन व्यतीत नहीं कर सकते। यह हमारे ऋषि-मुनियों तथा वैज्ञानिकों के द्वारा सिद्ध हो चुका है और अनेकों इस तरह के उदाहरण हैं। प्रयोग के तौर पर यह मंत्र मैं जन कल्याण के लिए बता रहा हूं जिसके प्रयोग से उन्हें अवश्य लाभ मिलेगा।

ॐ गं ह्रीं दुं दुर्गति नाशिन्यै महामायै स्वाहा ।

एवं

मंत्र : पत्नी मनोरमा देहि मनोवृत्तानुसारिणी

तारिणी संसारसागरस्य …कुलोद्भवाम् ।

इस मंत्र का उपयोग जो शतचण्डी पाठ के साथ करेगा उसे निश्चित लाभ होगा। इससे पहले भगवान गणपति की आराधना करें क्योंकि कोई भी पूजा करने से पहले भगवान गणपति की आराधना करना आवश्यक होता है, इससे पति-पत्नी में किसी भी प्रकार का तनाव समाप्त हो जायेगा।

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