Jagadguru MahaBrahmrishi Shree Kumar Swami ji

‘राम’ मंत्र की अति गोपनीय महिमा

ये दो अक्षरों का शब्द ‘राम‘ बहुत ही चमत्कारी है। हम जिस रामायण वाले राम की बात करते हैं तो वह तो एक अवतार था और उनके सिमरण मात्र से ही कल्याण होता है। लेकिन इसका मूल बता रहा हूं कि ‘राम’ शब्द का उद्भव ‘ह्रांग’ से हुआ है। जब हम ह्रांग का उच्चारण करते हैं तो यह रांग के रूप में जिह्वा पर आता है अर्थात् हमें रांग सुनाई देता है। निरंतर रांग उच्चारित यह रांग ‘राम’ में परिवर्तित हो जाता है। इस तरह राम एक महामंत्र के रूप में जब साधक को सिद्धि प्रदान कर देता है तब इसके दूरगामी परिणाम तो होते ही हैं, तत्क्षण प्रभाव भी होता है। राम शब्द का जाप करते ही साधक अपनी सब परेशानियों व चिन्ताओं से मुक्त हो जाता है। राम का जाप साधक के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना देता है जिससे भी नकारात्मक शक्ति उसे हानि नहीं पहुंचा पाती। तनाव व डिप्रेशन तो तत्क्षण ही नष्ट हो जाते हैं और साधक में आत्मविश्वास, नवचेतना व ऊर्जा का संचार होने लगता है। ‘रांग’ के निरूपण ‘राम’ को निरंतर जाप करने वाला व्यक्ति हर क्षेत्र में उन्नति करता है और उसके कार्य में आने वाली बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। इस राम नाम के महामंत्र को बड़े-बड़े संतों, महात्माओं और ऋषि-मुनियों ने निरंतर काल तक जपा है। महर्षि वाल्मीकि ने तो उल्टा ‘मरा-मरा’ जपते-जपते ही राम को पा लिया था। (पंचकुला समागम) 

प्रभु कृपा पत्रिका, जनवरी, 2019

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