Jagadguru MahaBrahmrishi Shree Kumar Swami ji

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Episode 4: निष्काम भक्ति से कैसे होती है रोग मुक्ति

00:00:09 – परम पूज्य महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी नामक कल्पवृक्ष ने भारत में ही नहीं पूरे विश्व को अपनी कृपाओं से कृतार्थ किया। वेदों के शास्त्रोक्त बीज मंत्रों के प्रभाव को देश विदेश के बुद्धिजीवियों ने भी स्वीकारा । 2 मई 2011 को यूएस के न्यूयॉर्क सीनेट ने निर्विरोध प्रस्ताव पारित करके परम पूज्य महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी को सम्मानित किया। 00:00:43 – नासाउ काउंटी के असेंबली हॉल में आयोजित एक भव्य समारोह में सीनेट में निर्विरोध प्रस्ताव पारित करके 29 अप्रैल को ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी डे घोषित किया गया। इस प्रकार देश विदेशों की सांसदों ने कृतज्ञ भाव से अनेकों पुरस्कार ऐंजल ऑफ ह्यूमैनिटी, प्राइड ऑफ वर्ल्ड, हैपिनेस हेल्थ ऐंड पीस एंबेसडर अवार्ड इत्यादि से सम्मानित किया। विश्व के शक्तिशाली देशों ने अंततः बीज मंत्रों की सनातन शक्ति को स्वीकार कर ही लिया। 00:01:20 – परम पूज्य महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी केवल अध्यात्म से ही नहीं, वरन दैवव्यापश्रय चिकित्सा और अभिमंत्रित औषधियों से भी असाध्य रोगों का निवारण करते हैं जिसका आधुनिक मेडिकल साइंस के पास कोई इलाज नहीं है। परम पूज्य महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी को लोगों के चित्र देखकर रोग विश्लेषण एवं उनके समाधान हेतु ऑल इंडिया हकीम अजमल खान अवॉर्ड और बेस्ट आयुर्वेदिक फिजिशन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। 00:02:03 – यह आश्चर्यजनक अद्भुत सत्य है कि केवल चित्र देखकर रोगों और समस्याओं के विषय में न केवल बताना बल्कि सहज सरल साक्षात समाधान करना। वर्ष 2002 में आस्था चैनल पर  प्रसारित कार्यक्रम आयुर्विज्ञान के रहस्य में महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी ने 21 वर्ष पहले ऐसा प्रत्यक्ष करके पूरे विश्व को आश्चर्यचकित किया था। यह कार्यक्रम उस समय सबसे अधिक लोकप्रिय कार्यक्रमों में  00:02:34 – एक कार्यक्रम माना गया था। आपकी बारम्बार की माँग पर इस कार्यक्रम के मुख्य अंश यूट्यूब में प्रसारित किए जा रहे हैं। 00:02:46 – ये पत्र हमारे पास आया है, दिल्ली से हैं नीना मल्होत्रा जी का तो इन्होंने अपनी तस्वीर भेजी है, आप बताए इनकी क्या-क्या शारीरिक समस्या है? 00:02:58 – एक तो इन्हें इनकी बॉडी में आयोडीन की कमी है । 00:03:03 – इनके जो आँखों का हिस्सा है उसमें कालापन अधिक रहता है और इनकी हड्डियों के हिस्से में भी कमज़ोरी है क्योंकि इनके जो हिप्स के हिस्से हैं इनकी फोटो में तो सिर्फ इनका चेहरा नज़र आ रहा है लेकिन उनका जो हिप्स का हिस्सा है वो ज्यादा हैवी है क्योंकि यह एक्सरसाइज भी करते हैं, डाइटिंग भी करते हैं तब भी वो हिस्सा कम नहीं होता और इन्हें हार्मोन का भी इम्बैलेंस है। हार्मोन्स की भी, क्योंकि इनकी माता को ये रोग है । माता से इनको मिला हुआ है। 00:03:32 – और पेट इनका काफी समय से साफ नहीं है और श्रम क्रिटिनाइन और प्रोटीन ये जरूर टेस्ट करा लें और T3, T4, Tsh भी ये टेस्ट करा लें और कम्पलीट हैमोग्राम भी ये टेस्ट करा लें । उसमें भी उनको प्रॉब्लम है । कुछ मैं इन्हें औषधि, एक तो इनको माइग्रेन है दर्द इनको काफ़ी रहता है और ये सोचते बहुत हैं जब ये किसी चीज़ के बारे में सोचते हैं फिर उसी के बारे में सोचते ही रहते हैं और कभी-कभी ये ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं। कभी-कभी ये खाते भी नहीं है और पेट भी इनका पूरा साफ नहीं होता और लिवर भी इनका बढ़ा हुआ है और जो मैं इन्हें औषधि बताऊँगा तो प्रभु कृपा से ये ठीक हो जाएंगे। इनका दर्द भी ठीक हो जाएगा। इनकी टेंशन भी ठीक हो जाएगी। 00:04:12 – और ये जो सोचते हैं, बार-बार सोचते हैं इनका सिर बड़ा भारी रहता है, उससे भी ठीक हो जाएगा और इन्हें सायनोसिस भी प्रारंभ हो चुका है क्योंकि इनके फादर को ये सायनोसिस का रोग है। ये इनको इनके फादर से मिला है और ये इनके जो हिप्स का हिस्सा हेवी है और कभी-कभी इनके पैरों में दर्द होता है। ये रोग इनकी मदर ने इनको गिफ्ट में दिया है तो दोनों का इलाज में इनको बता रहा हूँ कि दोनों के रोगों से मुक्ति मिलेंगे। एक तो भिंडी के बीज, एक तरबूज के बीज, एक सीताफल के बीज, एक मैनमेस के बीज और एक 00:04:49 – तोरी के बीज, इन सभी को ये छाया में सुखा लें। धूप में न सुखाये, छाया में सुखाने के बाद इनको ये पीस लें और पीसने के बाद शहद में पोदीने का रस और अलसी का  00:05:03 – थोड़ा सा प्रयोग कर दें। एक ग्राम का प्रयोग कर दें तो इनको मिक्स करके ये बोतल में डाल के रख लेंगे तो उसका आधा चम्मच ये सुबह-शाम प्रयोग करें तो तीन चार मंथ में ये रोग से भी मुक्त हो जाएंगे। और इन्हें किसी प्रकार का अवसाद भी नहीं होगा और ये हमेशा प्रसन्न, देखने में अच्छे लगते हैं। लेकिन ये हमेशा उदास फील करते हैं। इनके अंदर इन्फीरिओरिटी कॉम्प्लेक्स बड़ी है। ये सोचते हैं कि मैं ये कर पाऊंगी या नहीं कर पाऊंगी? कई बार ये 00:05:29 – करने में समर्थ होते हुए भी ये जो इनकी मानसिक तनाव है ये उन्हें इस कार्य में असफलता दे देता, ये सफल नहीं हो पाती तो इससे उस रोग से भी उन्हें मुक्ति मिल जाएगी तो प्रभु की कृपा से ये ठीक हो जाएंगे। अगर देखा जाए 99% प्रतिशत लोग रोगी हैं कलयुग का प्रभाव, लेकिन हम कलयुग में एक बात देख रहे हैं कि धर्म जो है वो बढ़ रहा है। क्या ये बात सही है कि धर्म में लोगों की आस्था बढ़ रही है? 00:05:55 – ऐसा है ये किसी हद तक सही भी है और किसी हद तक ये सही होने का आभास भी देता है 00:06:07 – जैसे आप आपके घर में गाय है आप गाय की बड़ी सेवा कर रहे हैं। और जो भी उन्हें अच्छे पदार्थ खाने के लिए देते हैं। 00:06:19 – लेकिन उसके पीछे आपको पता है कि यह ये मैं इन्हें अच्छे पदार्थ खिला रहा हूँ इसका कारण है कि मैं अच्छा दूध प्राप्त करूँ। 00:06:27 – अच्छा दूध मुझे मिले। तो वो गाय की सेवा नहीं है। वो आपका एक कर्म है, वो आपका एक व्यापार है, वो आपके एक साधन है। 00:06:38 – जो लोग आध्यात्मिक रूप से आज भक्ति कर रहे हैं उनके पीछे एक तो भय है क्योंकि उन्हें पता है कि समाज में जो रोग फैल रहे हैं, उनका चिकित्सा विज्ञान के पास कोई इलाज नहीं है। 00:06:54 – और वो अपनी तरफ से बुरे कर्म भी

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Episode 3: जीवन ऊर्जा और रोगों का संबंध

00:00:36 – यह आश्चर्यजनक अद्भुत सत्य है कि केवल चित्र देखकर रोगों और समस्याओं के विषय में न केवल बताना बल्कि सहज सरल साक्षात समाधान करना। वर्ष 2002 में आस्था चैनल पर  प्रसारित कार्यक्रम आयुर्विज्ञान के रहस्य में महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी ने 21 वर्ष पहले ऐसा प्रत्यक्ष करके पूरे विश्व को आश्चर्यचकित किया था। यह कार्यक्रम उस समय सबसे अधिक  00:01:08 – लोकप्रिय कार्यक्रमों में एक कार्यक्रम माना गया था। आपकी बारम्बार की माँग पर इस कार्यक्रम के मुख्य अंश यूट्यूब में प्रसारित किए जा रहे हैं। 00:01:22 – ये हमारे पास फोटोग्राफ आयी है मिस्टर पंकज की, तस्वीर देखकर आप बताए की कौन कौन से रोग हो सकते हैं ? 00:01:29 – मिस्टर पंकज की फैमिली में इसको अपस्मार है और इन्हें प्रारंभिक अवस्था में वह प्रारंभ हो चुका है 00:01:38 – और इन्हें मानसिक अवसाद भी काफी रहता है, काफी सोचते हैं, काफी विचारते हैं ये और इनके कभी राइट पैर के हिस्से में 00:01:47 – एक नाड़ी है, उसमें शोथ है, उसमें स्वेलिंग है, उसका ब्रेन से दिमाग से सीधा लिंक है इनके सिर में कभी-कभी काफी दर्द होता है और उस समय उनके पैर के हिस्से में भी वो उसका वो कारण बनता है और इनका पेट काफी समय से साफ नहीं है क्योंकि इनके पिता जी को भी कब्ज का रोग है। इन्हें कब्ज भी नहीं है लेकिन इनका पेट काफी समय से साफ नहीं होता और जब ये बाल्य अवस्था में थे उस समय इन्हें टायफॉईड जब हुआ था तो टाइफाइड के समय में इन्हें टाइफाइड का उपचार नहीं किया था। इन्हें वो बुखार कम से कम तीन-चार मंथ तक लगातार रहा था। उसके बाद से इनके मस्तिष्क में है वो शोथ वरण प्रारंभ हो चुका है। 00:02:28 – तो इनका जो उपचार मैं बताऊँगा उससे वो उनका जो वरण शोथ है वो भी समाप्त हो जाएगा और इनको हर छः महीने में या तीन-चार महीने में एक बार बुखार अवश्य आएगा । उसका कारण है कि इनकी प्लीहा बढ़ी हुई है। उसी समय से इनकी प्लीहा बढ़ी हुई है तो इससे वो रोग भी इनका ठीक हो जाएगा । इनको बार-बार बुखार भी नहीं होगा। एक तो ये जितना हो सके काली मिर्च, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, नागरमोथा, 00:02:56 – और सुरंजना के पत्ते और बेरी के पत्ते । यह सभी को मिलाकर उसे सुखालें पहले फिर उसको कूट-पीस लें और गाय के कच्चे दूध के साथ और शहद के साथ दोनों मिला लें। गाय का दूध और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर उसके साथ ही आधा चम्मच सुबह-शाम खाएं तो ये इनका रोग भी ठीक हो जाएगा। इन्हें जो बार-बार बुखार होता है वो भी ठीक हो जाएगा और ये जो मूर्च्छा का इन्हें कभी-कभी हो जाता है वो भी समाप्त हो जाएगा। 00:03:23 – मैं यह अनुभव अपने पति के बारे में बताना चाहती हूँ। मेरे पति जब 2 साल के थे तब से उनके दौरे पड़ते थे तभी से वो दवाई खा रहे थे। थोड़े बहुत झटके उन्हें कभी-कभी लगते थे। पर पिछली तीन तारिक को रविवार को उन्हें तीन-चार दौरे इकट्ठे पड़े। सुबह के टाइम जब उन्हें 4:30 बजे दौरा पड़ा तो उन्होंने कहा कि मेरा हाथ सुन हो गया। मैं मन ही मन बीज मंत्रों का जाप करती रही तो थोड़ी देर में उन्हें होश आया और उन्होंने कहा की मेरा हाथ ठीक है। 00:04:00 – मैं एक चर्चा आपसे करना चाहुँगा। जैसे विद्वानों का मत है कि जीवन ऊर्जा का बहुत अहम स्थान मानते हैं तो जीवन ऊर्जा का महत्त्व है क्या ? जीवन है या शरीर है या संसार है 00:04:14 – वो अगर उसको गहराई से वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, अध्यात्मिक दृष्टिकोण से, वास्तविकता से देखा जाए 00:04:24 – तो ये जगत ऊर्जा के अलावा और कुछ भी नहीं है। हमें जो दृश्य नज़र आ रहे हैं रंग नज़र आ रहे हैं। ये भी अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से या माइक्रोस्कोप से अगर हम अपने हाथ को भी देखेंगे जैसे दूध है या दही है। अगर आप दही को माइक्रोस्कोप से देखेंगे तो वहाँ आपको दही नाम की वस्तु नजर नहीं आएगी, वहाँ आपको जीवाणु ही नज़र आएँगे, जीवाणु चलते हुए। 00:04:48 – और सूक्ष्म दृष्टि से माइक्रोस्कोप से देखा जाए तो फिर वो ऊर्जा नजर आएगी, ऊर्जा प्रतीत होगी। अभी हमें ये देखने में हमारे हाथ नज़र आ रहे हैं। अगर इन्हें सूक्ष्म दृष्टि से देखा जाए जिसके काफी पॉवरफुल लेन्स हों तो हमें हाथ नज़र नहीं आएगा कुछ जीवाणु चलते हुए नजर आएँगे। 00:05:08 – और भी सूक्ष्म माइक्रोस्कोप से देखा जाए तो ये हमें ऊर्जा नज़र आएगी। 00:05:14 – तो जो भी जगत में नजर आ रहा है ऊर्जा का ही रूप है। ऊर्जा के अलावा और कुछ भी नहीं। 00:05:21 – जो हमे, हमारी दृष्टि को, हमारी आँखों को जो नज़र आ रहा है वह वास्तव में उतना ही नज़र आ रहा है जैसे कि आकाश है। हमें नीला नज़र आता है। ये नीला का मतलब है कि हमारी आँखें इससे ज्यादा देख नहीं सकती। इसलिए अमीन नीला, नीला नज़र आता है। अगर हम इतना दूर और चले जाये तभी ये नीलापन ये ऐसे ही फैलता रहेगा। इतना ही रहेगा। 00:05:42 – तो ये जगत जितना भी है ये ऊर्जाओं का समूह है। ऊर्जाओं का विघटन है, ऊर्जाओं का समन्वय है, ऊर्जाओं का मिलन है, ऊर्जा का आना है, ऊर्जाओं का जाना है। 00:05:54 – तो हमारा जो शरीर है, जो भी ब्रह्मांड में जो-जो प्रतीत होता है वो सारा कुछ हमारे शरीर के अंदर है तो मूल रूप से वैज्ञानिकों ने जैसे एक माना है। अगर ऊर्जाओं को भी आप सूक्ष्म से देखते जाओ तो फिर अंतिम मैं आपको एक तत्व मिलेगा जिसे तोड़ा नहीं जा सकता, जिसे जोड़ा नहीं जा सकता, जिसे जलाया नहीं जा सकता, जिसे किसी तरह से नष्ट नहीं किया जा सकता। वो एक तत्व है जिससे वहाँ ऊर्जा भी आकर जिसका कुछ नहीं करेगी क्योंकि वो ऊर्जा का निर्माण करने वाला तत्व है, उसे ही ऋषि मुनियों ने परमात्म तत्व कहा है, ब्रह्म कहा है। 00:06:33 – अपना अस्तित्व कहा है जो उस तत्व को जान लेता है वो सारे तत्वों को जान लेता है तो उस एक तत्व से तीन की उत्पत्ति हुई है। उसी को ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश कहा गया है। उसके बाद अलग-अलग तत्वों की उत्पत्ति हुई है। उन तत्वों के बाद फिर ऊर्जा का विकास हुआ है तो हमारे

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Episode 2: Muscular dystrophy का आयुर्वेदिक उपचार

00:00:36 – यह आश्चर्यजनक अद्भुत सत्य है कि केवल चित्र देखकर रोगों और समस्याओं के विषय में न केवल बताना बल्कि सहज सरल साक्षात समाधान करना। वर्ष 2002 में आस्था चैनल पर  प्रसारित कार्यक्रम आयुर्विज्ञान के रहस्य में महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी ने 21 वर्ष पहले ऐसा प्रत्यक्ष करके पूरे विश्व को आश्चर्यचकित किया था। यह कार्यक्रम उस समय सबसे अधिक 00:01:08 – लोकप्रिय कार्यक्रमों में एक कार्यक्रम माना गया था। आपकी बारम्बार की मांग पर इस कार्यक्रम के मुख्य अंश यूट्यूब में प्रसारित किए जा रहे हैं। 00:01:22 – परम पूज्य गुरुदेव ये पत्र हमारे पास आया है शिमला से महेंद्र चौहान जी का और उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है। मैं एक ऐसे रोग का शिकार हूँ कि हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब मैं ठीक से चल भी नहीं सकता। 00:01:35 – देशी विदेशी बहुत इलाज करवाए हैं, लेकिन अभी तक कोई भी फायदा नहीं हुआ है। पीजीआइ चंडीगढ़ के डॉक्टर ने तो साफ कह दिया है इस बिमारी का इलाज अभी तक कहीं भी बना ही नहीं है । परम पूज्य गुरुदेव मैं 00:01:49– इनकी तस्वीर आपके चरणों में अर्पित कर रहा हूँ और जो गंभीर स्थिति है उस पर आप कृपा करें। 00:02:02 – जो आपने अपना चित्र व पत्र भेजा है आप नि:संदेह ऐसे रोग से ग्रस्त हैं 00:02:11 – जिसका इस पृथ्वी पर कोई भी इलाज संभव नहीं है 00:02:18 – आपको जो आपके चिकित्सकों ने या पीजीआई के चंडीगढ़ के जो डॉक्टरों ने या जिन-जिन भी 00:02:30 – विशेषज्ञों ने आपको बताया है कि इसका कोई इलाज नहीं है। 00:02:35 – वास्तव में उन्होंने आपको सत्य बताया है, ठीक ही बताया है। 00:02:39 – क्योंकि ऐलोपैथिक विज्ञान में 00:02:42 – आधुनिक विज्ञान में इस बिमारी का कोई भी इलाज नहीं है जो रोग है ये धीरे-धीरे शरीर को 00:02:52 – सूखता जाता है समाप्त करता रहता है, शरीर को मृत करता जाता है। 00:02:59 – इसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी कहते हैं। 00:03:03 – जिसका अभी पृथ्वी पर कोई भी इलाज संभव नहीं है। 00:03:07 – विश्व के किसी भी कोने में किसी भी चिकित्सक के द्वारा इसका इलाज नहीं खोजा गया। 00:03:14 – और इसके जो कारण हैं उसके गहनतम रहस्यों के बारे में भी नहीं जान पाए। 00:03:20 – इसीलिए उन चिकित्सकों ने आपको जो बताया है। 00:03:24 – वो अपनी दृष्टिकोण से ठीक बताया है कि उनके पास 00:03:29 – इसका कोई इलाज नहीं है क्योंकि जब भी कोई चिकित्सक बताता है 00:03:36 – कोई ये कहता है कि इस बिमारी का पृथ्वी पर कोई इलाज नहीं है। तो उस चिकित्सक को ऐसा कहने के बजाए यह कहना चाहिए 00:03:47 – कि हमारे पास हमारे विज्ञान में हमारी एलोपैथिक चिकित्सा साइंस में इसका कोई इलाज नहीं है। 00:03:57 – किसी भी चिकित्सक को कभी ये नहीं कहना चाहिए कि इसका इस पृथ्वी पर कहीं भी कोई भी इलाज नहीं है। यह दावा 00:04:05 – ये जो बात है यह रोगी को और अधिक रोग से ग्रस्त कर देती है और पीड़ा से संताप से ग्रस्त कर देती है। प्रभु के जो हाथ है, प्रभु की कृपा है। 00:04:19 – वो असाध्य से असाध्य कार्य को भी साध्य कर सकता है। प्रभु की कृपा प्रभु जो चाहे कर सकता है प्रभु सृष्टि का स्वामी है। 00:04:30 – प्रभु कृपावान है, करुणावान है, दयावान है। जहाँ सभी विचार, सभी सोच 00:04:38 – जैसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब में लिखा है कि “सोचै सोचि न होवई जे सोची लख वार”। ये जो वैज्ञानिक हैं डॉक्टर हैं, चाहे कितना भी सोचते रहें। 00:04:48 – इसके बारे में गहनता के बारे में अध्यात्म के बारे में सत्य के बारे में यथार्थ के बारे में सोच से 00:04:58 – समझ में नहीं आता बुद्धि के द्वारा समझ में नहीं आता। तो जो वैज्ञानिको ने, डॉक्टरों ने आपको बताया है उनके कहने का अभिप्राय इतना है कि हमारे पास 00:05:12 – हमारी चिकित्सा, हमारी चिकित्सा पैथी में इसका कोई भी इलाज नहीं है। 00:05:18 – और प्रभु की कृपा से जो मैं आपको दवाई लिखूंगा आप उसे नोट करे। वो इस मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से भारतवर्ष में विदेशों में, अमेरिका में, कनाडा में, जापान में 00:05:32 – अनंत-अनंत व्यक्ति इस रोग से ग्रस्त है और इस रोग के करके अनंत व्यक्ति मृत्यु शैया पर लेट चुके हैं एसा ये भयंकर रोग जीवन को 00:05:45 – घुन की तरह, दीमक की तरह खाता रहता है जिसका कोई भी इलाज अभी पृथ्वी पर संभव नहीं है। आधुनिक विज्ञान के पास 00:05:53 – जो मैं आपको बताऊँगा उससे प्रभु की कृपा से नि:संदेह आप इस रोग से मुक्ति प्राप्त करेंगे और पुनः अपने जीवन को उसी तरह जिस प्रकार पहले अपने जीवन को चलाते थे। स्वस्थ होकर उसी तरह आपका जीवन पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा और ठीक होने के बाद आप अपने डॉक्टरों को दिखाएं। 00:06:14 – चिकित्सकों को दिखाएं। पीजीआइ के जो डॉक्टरों ने आपको बोला था की ये ठीक नहीं हो सकता। ठीक होने के बाद आप उनके पास जाएं, उन्हें बताए कि चिकित्सक से जो ऊपर है, प्रभु की कृपा है और जो प्रमु की कृपा है। प्रभु का जो नियम है वो जो चाहे कर सकता है। 00:06:33 – ऐसा आयुर्वेद का, ग्रंथों का, ऋषि-मुनियों का, संतों का मत है। उनका कहना है उनके आशीर्वाद का फल है। 00:06:44 – तो औषधि आप नोट करें। अश्वगंध की जड़ 10 ग्राम, 00:06:51 – बेरी के पत्ते 10 ग्राम, सुहंजना की फली 10 ग्राम, बेरीगेटा केना का पत्ता 1 ग्राम 00:07:03 – चने का जो छिलका होता है जिसे हम फेंक देते हैं वो 10 ग्राम। 00:07:09 – सोंफ, पहाड़ी सोंफ 10 ग्राम। बिहर बूटी 5 ग्राम। कुलंजना 1 ग्राम। 00:07:18 – गूगल 100 ग्राम, छोटी इलायची 5 ग्राम 00:07:25 – बच 5 ग्राम, सुरंजना , 10 ग्राम। मग पीपल 10 ग्राम। 00:07:35 – अश्वगंध की जड़ 20 ग्राम।, केसर की जड़ 5 ग्राम। 00:07:43 – और केसर के जो हल्की-हल्की छोटे पत्ते हैं वो 5 ग्राम, सुहंजना के फूल, सुहंजना के पत्ते। 00:07:50 – सुहंजना की जड़ पांच-पांच ग्राम। 00:07:55 – सभी को आप लेकर कूट पीसकर कपड़छान कर ले। 00:08:00 – और उसमें 1 ग्राम वज्र भस्म, एक ग्राम स्वर्ण भस्म। 00:08:04 – एक ग्राम लोह भस्म। एक ग्राम मंडूर भस्म। 00:08:09 – एक ग्राम टंकन भस्म एक

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Episode 1: ज्योतिष और आयुर्वेद में रोग विश्लेषण

00:00:24 – यह आश्चर्यजनक अद्भुत सत्य है कि केवल चित्र देखकर रोगों और समस्याओं के विषय में न केवल बताना बल्कि सहज सरल साक्षात समाधान करना। 00:00:35 – वर्ष 2002 में आस्था चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम आयुर्विज्ञान के रहस्य में महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी ने 21 वर्ष पहले ऐसा प्रत्यक्ष करके 00:00:49 – पूरे विश्व को आश्चर्यचकित किया था। यह कार्यक्रम उस समय सबसे अधिक 00:00:55 – लोकप्रिय कार्यक्रमों में एक कार्यक्रम माना गया था। 00:00:59 – आपकी बारम्बार की मांग पर इस कार्यक्रम के मुख्य अंश यूट्यूब में प्रसारित किए जा रहे हैं। 00:01:09 – ये है कोलकाता की उमा, इनकी डेट ऑफ बर्थ है 21-9-87। 00:01:14 – समय है इनका संध्या का 7:30 बजे, 00:01:16 – क्या आप बताना चाहेंगे कि इस बालिका को क्या-क्या रोग है ? 00:01:20 – इस बालिका को एक तो मिर्गी रोग है और बचपन में इसे पांडु रोग, पीलिया रोग हो गया था और इसे मूत्रावरोध भी है। इसका लीवर भी ठीक नहीं है और इसके पेट में भी ई हिस्टोलिटिका है। अगर ये मेहंदी के पत्ते 3 दिन सूंघे और मैनमेस  00:01:37 – और अश्वगंध की जड़ को ये रात को भिगो दें और सुबह उसे पीसकर चौथाई चम्मच शहद के साथ सुबह शाम लें तो एक हफ्ते में इस रोग से इनको मुक्ति मिलेगी । इसके कारण क्या है? इसके कारणों में एक तो ग्रह की स्थिति है, इनके ग्रह की स्थिति ठीक नहीं है। 00:01:54 – दूसरा इनकी माता को भी ये रोग थे। हेरिडिटरी भी कुछ चीज़ें होती है और तीसरा इनके खाने में सफाई की कमी है। अगर ये खाने में सफाई भी रखें और तीसरा इनके मस्तिष्क में भी विकार है। पढ़ने में भी इनका मन नहीं लगता पढ़ते हैं तो उनको याद नहीं होता तो ये अश्वगंध की जड़ को जैसे मैंने उपचार में बताया है ये इसको करेंगे तो ये ठीक हो जाएंगे। जो ग्रहों की स्थिति चल रही है किसी व्यक्ति की जो उसकी कुंडली का उल्लेख आता है, जो नक्षत्रों की स्थिति है, क्या उसका असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है? अगर हमारे नक्षत्रों 00:02:27 – की कैसी स्थिति है? ग्रहों की कैसी स्थिति है तो इसीका ही हमारे पूरे शरीर पर प्रभाव पड़ रहा है। हम जो खा रहे हैं पी रहे हैं, चल रहे हैं, जा रहे हैं। हमारा जो जीवन है मृत्यु है, हमारा जो विद्या है, अध्ययन है, विकास है, विनाश है, दुख है, सुख है, ये ग्रहों पे ही निर्धारित है। आयुर्वेद और ग्रह एक ही मिलकर दो बने हैं। 00:02:49 – आयुर्वेद और नक्षत्रों की स्थिति में यह भिन्न-भिन्न नहीं है, जो आचार्य ये मानते हैं जो आचार्य आयुर्वेद और ग्रहों को अलग-अलग मानती है या ग्रहों की स्थिति को नहीं जानते, केवल आयुर्वेद को जानते हैं। वो आयुर्वेद के पुर्णङ्गों को नहीं जानते । आयुर्वेद के पूर्ण स्थिति को नहीं जानते और जो ज्योतिषाचार्य आयुर्वेद को नहीं जानते हैं वो भी अर्धांग को जानते हैं पूर्णांग को  00:03:10 – नहीं जानते अगर कोई आचार्य आयुर्वेद को जानेगा और आयुर्वेदाचार्य ज्योतिष को जानेगा तो ये पूर्ण विज्ञान होगा। जैसे ये कहा जाता है कि आयुर्विज्ञान में जो पहलू हैं, उसमें ज्योतिष भी शामिल होता है और आध्यात्मिक ज्ञान भी शामिल होता है तो आखिर इसके पीछे कारण क्या है? मूल रूप से देखा जाए तो जो सृष्टि का कर्ता है वो एक है। 00:03:32 – एक के बाद तीन की उत्पति हुई, जिसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश का नाम दिया जाता है। इसे ही विज्ञान में इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन का नाम दिया जाता है और इसे ही वात-पित्त-कफ का नाम भी दिया जाता है। तो अगर किसी आदमी का वात-पित्त-कफ बैलेंस है, उसकी स्थिति बराबर है, सही दिशा में वो जा रहा है तो उसे कोई रोग नहीं होगा। इनकी स्थिति में जब परिवर्तन आता है तभी हमारे शरीर में विकार होते हैं, रोग होते हैं और ये ग्रहों के कारण भी होता है और हमारे खाने पीने के व्यवहार में कमी होने के कारण भी होता है। 00:04:05 – और सही स्थिति में उपचार न होने से भी ये होता है। ये हैं बिहार की निहारिका नूपुर ये किस-किस रोगों से ग्रस्थ हैं ? 00:04:14 – एक तो इनको कण्डु रोग इसे बोलते है, जिसे सिर्फ शारीरिक विकास होगी। एलर्जी हो गई और इसके। 00:04:22 – शरीर में एक तो भूख की कमी रहती है। अरुचि भी इसे होती है और यह जो भी खाती है उसे डाइजेस्ट नहीं होता और इसे फ्यूचर में किडनी की प्रॉब्लम होने की संभावना है और इसे साइनोसाइटिस भी है। ये नासिका में जब स्वांस लेती है, इसे सांस लेने में भी प्रॉब्लम आती है और इनकी माताजी को आर्थराइटिस है, जोड़ों में दर्द है। तो ये भी जब सीढ़ियों पर  उतरती चढ़ती है तो इसे भी जोड़ों में कभी कभी दर्द होता है और इसके कमर में भी दर्द होता है और इसे माइग्रेन की भी तकलीफ है। उस दर्द के लिए जो वो औषधि खाती है उससे इनको एसिडिटी होने लगती है । 00:04:59 – तो अगर ये काला नमक और काली मिर्च दोनों को बराबर मिला के शीशी में ढक के रख लें और उसका चौथाई चम्मच सुबह शाम लें तो एक मंथ में इसका रोग समूल नष्ट हो जाएगा। क्या ये बात सही है कि जो पेरेंट्स के रोग की स्थिति होती है, बच्चों पर इसका प्रभाव पड़ता है? हाँ, जब पैरेंटस के उनका हद है, उनकी कद है, उनकी हाइट है और उनका जो 00:05:22 – शुगर है, उनके दामा हैं, उनका रंग है, उनके शरीर का रूप है, आकार है जब वो हमारे माता पिता से मिलते हैं, उनकी आँखें हैं, उनकी नाक है, उनके कान है तो कुछ ऐसे रोग हैं जो पैतृक है। 00:05:38 – तो जब माता पिता से हमारा रंग रुप मिलता है तो रोग भी हमें माता पिता से मिलते हैं। वातावरण से भी मिलते है, ग्रहों से भी मिलते है और कर्मों से भी मिलते हैं। 00:05:49 – ये इसमें नि:संदेह इनका हाथ है। तो क्या आप निहारिका का चित्र देखकर उसकी माता जी और पिता जी का भी विवरण दे सकते हैं । 00:05:57 – हाँ दे सकते हैं। वो कैसे ? 00:05:59 – क्योंकि बच्चा और माता पिता एक होते हैं। कहीं गहरे में देखा जाए तो ये चंद्रमा है और तारे हैं। हमें अलग-अलग लगते हैं लेकिन अगर आप आंतरिक गहराई में जाएंगे तो चन्द्रमा और तारे और सूर्य ये अलग-अलग नहीं है। चंद्रमा सूर्य से लेता

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स्वयं को मिटाने पर मिलता है अध्यात्म 

अध्यात्म के विषय से आनंद दायक इस जगत में और कुछ नहीं है। अध्यात्म का क्षेत्र सागर की गहराई से भी अधिक व्यापक है। सागर, पृथ्वी और गृह आदि की सीमा है लेकिन अध्यात्म की कोई सीमा नहीं है। अध्यात्म के क्षेत्र का विस्तार सूर्य और चन्द्रमा से कही अधिक है।  क्यों आवश्यक है अध्यात्म को जानना?  मुक्ति केवल तभी संभव है जब हम अध्यात्म को जान लेंगे। यदि आप अध्यात्म के बारे में जानना चाहते हैं तो सबसे पहले यह समझ लें कि अध्यात्म कुछ पाने का विषय नहीं है, बल्कि स्वयं के अस्तित्व को समाप्त करने का नाम ही अध्यात्म है। अध्यात्म के मार्ग पर केवल उसी व्यक्ति को जाना चाहिए जो स्वयं को मिटाने के लिए तैयार है। आशा है आपने इस तथ्य पर विचार किया होगा। आइये अध्यात्म के कुछ प्रमुख नियमो को जानते हैं –  व्यक्ति विशेष से अध्यात्म का कोई सम्बन्ध नहीं  जिस भी व्यक्ति ने अध्यात्म को किसी व्यक्ति विशेष से सम्बंधित माना है इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि वह व्यक्ति अध्यात्म को नहीं जानता। जैसे सूर्य, चाँद, धरती, अग्नि आदि को मेरा कहा जाए तो वह न्याय युक्त नहीं होगा ठीक वैसे ही अध्यात्म को मेरा या आपका कहना गलत होगा। अध्यात्म में “मेरा” या “आपका” जैसे शब्दों का कोई स्थान नहीं है।   अध्यात्म का मार्ग नहीं है कठिन   ऐसा माना जाता है कि अध्यात्म को जानना बहुत ही कठिन है, परन्तु ऐसा सोचने से हम अपना मार्ग स्वयं ही कठिन बना लेते हैं। अगर कोई व्यक्ति कार चलाना सीखने से पहले ही यह सोच लेगा कि कार चलाना बहुत कठिन है तो वह व्यक्ति कार चलाना कभी सीख ही नहीं पाएगा।   सुख और दुःख से पार है अध्यात्म   जीवन का सरल सा नियम है कि जो भी व्यक्ति या वस्तु हमें जितना सुख देगी उतना ही वह दुःख भी देगी। जितना प्रकाश होगा, उतनी ही रात भी होगी। लेकिन अध्यात्म सुख और दुःख दोंनो को भी छोड़ने का नाम है।   अध्यात्म का नियम– बांटने से बढ़ता है धन   जगत में ऐसा लगता है कि जितना हम धन दूसरे को देंगे उतना कम होगा, लेकिन अध्यात्म को जानने वाले यह भली भांति जानते हैं कि जितना बांटा जाएगा, उतना बढ़ेगा। ऐसा अध्यात्म का नियम है कि जो भी वस्तु हम जितनी बांटेंगे वो उतनी और अधिक बढ़ती जाएगी।  *अध्यात्म के मार्ग से लौटना असंभव   “ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे   इक आग का दरिया है और डूब के जाना है“  अध्यात्म में जाने के बाद वहां से लौटने का कोई मार्ग नहीं है क्योकि अध्यात्म को जानने के बाद हमारे अंदर अपना कुछ भी बाकी नहीं रहेगा, केवल परमात्मा ही बाकी रहेगा। अध्यात्म को जानने के बाद आप स्वयं परमात्मा स्वरुप हो जाएंगे, परमात्मा और आप में कोई फ़र्क़ नहीं रहेगा। जब अँधेरा प्रकाश को जान लेगा तो वह स्वयं अँधेरा ना रह कर प्रकाश ही बन जाएगा। अगर आपको अध्यात्म को जानना है तो यह खतरा आपको उठा कर चलना होगा कि आप समाप्त हो सकते हैं, समाप्त होना ही मुक्ति है।   जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि है मैं नाहीं ।  प्रेम गली अति सांकरी जामें दो न समाहीं ॥  *अध्यात्म के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा–इच्छा   यदि आप अध्यात्म को जानना चाहते हैं तो आगे बढ़ने की इच्छा का आपको सबसे पहले त्याग करना होगा। इच्छा शब्द सांसारिक व्यवहार का विषय है लेकिन अध्यात्म में इच्छा का कोई स्थान नहीं है। क्योकि इच्छा शब्द का सम्बन्ध मन से है, इच्छा का अर्थ हुआ कि आप मन को परिपक्व करना चाहते हैं। यहाँ तक कि इच्छाओं से पार जाने की कामना भी अध्यात्म में बाधा है, अर्थ यह हुआ कि आपने यह समझना है कि मुझे बढ़ना नहीं है मुझे मिटना है।   उदाहरण के लिए एक लोटा यदि यह सोचे कि मैं अपने अंदर सागर को समाने की इच्छा रखता हूँ  तो लोटे में कभी सागर नहीं आ सकता। जब लोटा सागर में जाएगा तो उस लोटे की इच्छा समाप्त हो जाएगी और लोटे का स्वयं का अस्तित्व बाकी नहीं रहेगा। लोटे का बाकी न रहना ही सागर में समाना है। यदि आप अध्यात्म को जानना चाहते हैं तो यह समझ लें कि आपकी जो इच्छा है उसका नामोनिशान मिट जाएगा।  जब हम कुछ कामना करते हैं या हम किसी चीज़ को पकड़ते हैं तो हम स्वयं भी बंध जाते हैं और हमारी मुक्तता समाप्त हो जाती है। जो व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को नियंत्रित करने या बाँधने की कामना रखता है, उसे परमात्मा भी सुख नहीं दे सकता क्योकि वह व्यक्ति स्वयं उस कामना में बंध गया है।  अध्यात्म को जानने का मार्ग केवल सतगुरु   जैसे अध्यात्म या परमात्मा एक है, वैसे ही अध्यात्म के बारे में ज्ञान देने वाला भी एक ही होता है। एक देश का एक प्रधान मंत्री होगा, एक राष्ट्रपति होगा उसी प्रकार अध्यात्म का ज्ञान देने वाला भी एक ही होता है। सतगुरु को अध्यात्म नामक ईमारत की नीव कहा जाए तो बिलकुल सही होगा। जैसी नीव होगी, वैसा ही आपका मकान बनेगा। सतगुरु के बिना अध्यात्म अर्थहीन है। सतगुरु कभी भी दो नहीं होते। स्वयं परमात्मा ही सतगुरु के रूप में अवतार लेते हैं।   सर्वप्रिय श्लोक देखें-  गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥  श्लोक का प्रचलित अर्थ-  इस श्लोक का अर्थ हम सभी यह पढ़ते या सुनते आये हैं कि हमारे शरीर धारी गुरु ही ब्रह्मा हैं, विष्णु हैं और महेश हैं । इसका अर्थ हम सभी यह समझते हैं कि जिस शरीर को हम अपना गुरु मान रहे हैं वे ही भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं। जबकि इस श्लोक का वास्तविक अर्थ यह है कि केवल भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ही हमारे वास्तविक गुरु हैं, इनके अलावा कोई और सतगुरु नहीं हैं।   विचार करने वाली बात यह है कि द्वापर में परमात्मा ने केवल एक ही कृष्ण रूप में अवतार लिया, उस समय एक से अधिक शरीर परमात्मा ने नहीं धारण किया, तो आज के युग में सभी शरीर धारी गुरु “सतगुरु” कैसे हो सकते हैं ? सतगुरु और गुरु दोनों शब्द अलग अर्थ रखते हैं। किसी विषय के बारे में ज्ञान देने वाला गुरु होता है

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सूर्य ग्रहण और अध्यात्म विज्ञान – सतगुरु वाणी

व्यावहारिक जगत और आधुनिक युग ग्रहण के प्रभाव को वहीं तक परिसीमित मानता है जहां पर ग्रहण दृष्टिगोचर होता है।  सूतक काल भी वहां मान्य नही होता जहां ग्रहण दिखाई नही देता। इस विषय में परम पूज्य सदगुरुदेव जी ने ऐसे अद्भुत रहस्य उद्घाटित किए जहां पहुंचकर ग्रन्थ शास्त्र भी मौन हो जाते हैं।  ज्योतिष और आधुनिक जगत दोनों ग्रहण के खगोलीय प्रारूप की वार्ता करते हैं। ग्रहण के प्रारूप को समझाते हुए परम पूज्य सदगुरुदेव जी ने भगवान राम और हनुमान जी की एक अद्भुत वार्ता का उल्लेख किया।  गुरुदेवजी ने उल्लेख किया कि भगवान हनुमान जी हर विषय के ज्ञाता हैं।  यह सारा ज्ञान भगवान हनुमान जी को भगवान सूर्य ने दिया था। गुरुदेवजी ने एक विलक्षण घटना का उल्लेख किया जिसमें ज्ञान देने वाले ज्ञान लेने वाले से भी ज्यादा विनम्र थे जो कि सामान्य स्थिति से भिन्न है।  यह घटना है भगवान राम और हनुमान जी के वार्तालाप की जिसमें भगवान राम जी गर्व से पूछ रहे हैं और हनुमान जी दंडवत प्रार्थना करके ज्योतिष के विषय में भगवान राम जी को बता रहे हैं।  हनुमान जी ज्ञान दे रहे थे पर अति विनम्र भाव से भगवान राम जी से पूछ रहे हैं कि हे भगवन! आप बताएं मैं किस विषय पर बोलू, आपकी क्या सेवा करूँ ? भगवान राम अवलोकन कर रहे थे कि हनुमान के पास हर विषय का ज्ञान है।  ये सूर्य चंद्रमा को भी अधीन कर सकते हैं।  ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की शक्ति रखते हैं।   हनुमान जी भगवान राम से भी शक्तिशाली हैं। राजा दशरथ के बेटे राम से शक्तिशाली हैं, भगवान राम से नही।   एक राम दशरथ का बेटा,  एक राम घट घट में लेटा (जो कण कण में है)  एक राम है जगत पसारा (जिसने जगत को पैदा किया है)  एक राम है जगत से न्यारा (जो जग से पार है) – इस राम को कोई नही मिटा सकता।   यह राम हनुमान को भी मिटा सकते हैं।  पूरे जगत को मिटा सकते हैं।   भगवान राम देख रहे थे कि हनुमान जी को ज्योतिष एवं अनंत विषयों का ज्ञान लेकर कहीं अहंकार तो नही हो गया ? पर उन्होंने देखा कि हनुमान जी में ज्ञान की वार्ता करते हुए लेश मात्र भी अहंकार नहीं था।   गुरुदेवजी ने समझाया कि ज्योतिष और अध्यात्म दो अलग विषय हैं, ज्योतिष अध्यात्म नही बन सका। ज्योतिष अध्यात्म के बारे में केवल बात करता है।  भगवान राम और हनुमान जी का संवाद भी खगोलीय ज्योतिष का था।   यह विषय मूल तत्व का है, तत्ववेत्ताओं और ब्रह्मवेत्ताओं का है।  बुद्धीजीवियों और ज्योतिष की समझ से पार का विषय है।  सदगुरुदेव जी समझाते हैं कि भगवान राम और भगवान कृष्ण की एक सुई जितनी बात भी हमने नही जानी और ना ही किसी ने लिखी। रामायण और रामचरित्रमानस भगवान राम के प्रारूप का जो समुद्र है उसकी लहर मात्र ही उद्घाटित करते हैं।  जो भगवान वाल्मीकि जी ने प्रगट किया वह भगवान राम के महासागर के लहर की एक बूंद मात्र है। भगवान राम जी हनुमान जी को देख रहे थे और उनसे पूछ रहे थे कि जगत में इतने ज्ञान है पर आप मुझे ज्योतिष की बात ही क्यों बताना चाहते हैं ? भगवान हनुमान ने कहा प्रभु ज्योतिष का ज्ञान प्रत्यक्ष है, तथ्यगत है। आध्यात्म और अन्य विषयों का तो पता ही नही चलता कि अगले पल क्या हो जाए।   इस पर गुरुदेवजी ने उल्लेख किया कि ज्योतिष का ज्ञान तत्थ्यगत है पर सत्यगत नही है।  हम भगवान कृष्ण को मानते हैं कि इतनी रानियां हैं, इतने बच्चे हैं।  यह तथ्य भी नही है, सत्य तो बहुत दूर की बात है।   ज्योतिष के विषय में चर्चा करते हुए भगवान राम हनुमान जी से गर्व से कहते हैं कि मुझे अपरा की बात नही करनी। हनुमान जी दंडवत प्रणाम करके बैठे रहे।  भगवान राम तेज़ आवाज़ में बोले हनुमान तुम सूर्य से यह क्या ज्ञान लेकर आ गए ? यह तो शिक्षा है, यह ज्ञान मन से है। भगवान राम जी डांट रहे हैं कि हनुमान तुम यह क्या सीख कर आ गए ?  क्यों गए थे यह ज्ञान लेने ?  किस से पूछ कर गए ? हनुमान जी दंडवत प्रणाम कर के सुन रहे थे।  हनुमान जी ने आंख उठाकर नहीं देखा।   अध्यात्म का ज्ञान मन और बुद्धि से पार है।  चन्द्रमा मन स्वरुप है, सूर्य आत्मा स्वरुप है। चन्द्रमा का सारा प्रभाव मन पर पड़ता है।  जिसका चन्द्रमा कमज़ोर होगा वह अहंकार की बात करेगा।  जिसका सूर्य प्रगाढ़ होगा वह अपरा प्रकृति की बात ही नही करेगा।  ग्रहों का प्रभाव दुर्गा मां को छोड़कर भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश सभी देवी देवताओं पर भी पड़ता है।   आगे सदगुरुदेव जी ने अभूतपूर्व ज्ञान दिया कि जो सूर्य ग्रहण का प्रभाव है वह जहां ग्रहण दृष्टिगोचर नही होता वहां ज्यादा लगता है। यह सोच, समझ, मन, बुद्धि से पार का विषय है।   सदगुरुदेव जी ने समझाया – बरसात होती है एवेरेस्ट पर तब एवेरेस्ट पर रहने वाले चिंतित हो जाते हैं कि नियमित उपयोग का पानी कहां से आएगा।  वो बरसात का जल नही पी सकते।  पानी की सबसे ज्यादा कमी ऊंचाई पर जल के स्त्रोत्र के पास होती है और सबसे ज्यादा बीमारियाँ वहां होती है जहां पानी जाकर ठहरता है।  दूर जहां जाकर पानी ठहरता है वहां का पानी सबसे खराब होता है।   जहां सूर्य ग्रहण लगा हुआ है या दृष्टिगोचर हो रहा है वहां प्रभाव बहुत कम होगा। जहां नही लगा वहां ज़्यादा होगा, वहां ज्यादा रोग आएंगे, वहां ज्यादा कष्ट आएंगे।    जब महाभारत हुआ, सूर्य ग्रहण लगा। युद्ध खत्म हुआ, तब सूर्य ग्रहण लगा। तब सबसे ज़्यादा पाप वहां लगा जहां ग्रहण नही लगा था।  युद्ध वाले तो सब उसी क्षण मुक्त हो गए।   आगे पूज्य गुरुदेवजी ने समझाया सबसे ज्यादा बीमारियां तब होंगी जब गर्मी आने वाली है या जाने वाली है, बीच में कम होती हैं।  ज्यादा ठंड में नही होती, ज़्यादा गर्मी में नही होती। शिमला में बरसात हो रही है, आप दिल्ली में बैठे हैं तो सबसे ज़्यादा ठंड का ख़राब प्रभाव वहां पड़ेगा जहां बरसात नही हुई।  खासी, ज़ुकाम बीमारियाँ वहां ज़्यादा होंगी जहाँ बरसात नही हुई। तेज़ बरसात से छत पर प्रभाव नही होगा, पानी निकल जायेगा

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बीज मंत्रों के प्रभाव का महाआश्चर्य, ठीक हो रही है मस्कुलर डिस्ट्रफी

मस्कुलर डिस्को ऐसा असाध्य रोग है जो कि आधुनिक मेडिकल जगत के रिकोर्ड में लाइलाज है। इस रोग के शिकार व्यक्ति के मसल्स की कोशिकाएं और तंतु मृत हो जाते हैं जिस कारण शरीर पंगु हो जाता है। यह मसल्स के साथ-साथ हार्ट, नर्वस सिस्टम, आंखों, स्किन तथा शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। आप पढ़िये ऐसे ही एक किशोर तजेन्दर सिंह पर हुई गुरुदेव जी की कृपा का विवरण। मेरे बेटे तजेन्दर सिंह को मस्कुलर डिस्ट्रफी है। मैंने डाक्टर को दिखाया तो उन्होंने सीपीके (CPK) टेस्ट करवाने को कहा। रिपोर्ट में पता चला कि मेरे बेटे की सीपीके रेंज 14514 है जबकि सामान्य व्यक्ति में यह 35-232 होनी चाहिए। यह काफी ज्यादा थी। मिल्ट्री हास्पीटल के डाक्टरों ने तो यहां तक बोल दिया था कि बहनजी अब आप अपने बेटे को भूल जाओ। मेरे बेटे की बीमारी खतरनाक तरीके से रोज बढ़ती जा रही थी, यह बीमारी कभी कम नहीं होतीं। अपने बेटे की हालत देखकर में रोने लगी। मैंने भगवान का पाठ करना आरंभ किया। एक दिन मैंने अखबार में गुरुजी के बारे में पढ़ा। गुरुदेव का शिविर लुधियाना में था। जब मैं वहां गई तो गुरुदेव जी के दर्शन करके मुझे लगा कि ये वही अल्लाह, गुरु या फकीर हैं जिनकी मुझे तलाश थी। गुरुदेव के दर्शन कर मुझे विश्वास हो गया कि अब मैं सही जगह पर आ गई हूँ। गुरुदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद मैंने और मेरे पुत्र ने बीजमंत्रों का पाठ शुरू किया और विशेष कृपा भी ली। एक रात मैं गुरुजी के बारे में सोचती रही, मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं सोच रहाँ थी रात खत्म हो, सुबह गुरुजी के दर्शन करने हैं। उसी रात मैंने देखा कि गुरुदेव मेरे पास खड़े हैं, उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया। दूसरी रात मैंने देखा कि गुरुदेव और गुरुमां दोनों हमारे बैड के पास खड़े हैं। गुरुजी, गुरुमां को कह रहे हैं कि यह दवा बच्चे के मुंह में डाल दो। मैंने यह सारा दृश्य अपनी आंखों से देखा। गुरूजी की दया और दवा दोनों ने काम किया। मैंने अस्पताल जाकर अपने बेटे का फिर सीपीके टेस्ट करवाया इस बार सीपीके 2179 निकला। मैंने रेनबैक्सी के एक डाक्टर को केस दिखाया तो वे हैरान हो गए। उन्होंने कहा कि उनको जिंदगी में यह पहला केस देखने को मिला है जब किसी का सीपीके कम हुआ है। गुरुदेव के आशीर्वाद और बीजमंत्रों के पाठ से मेरा दुख दूर हो गया है। मेरे बेटे की फिजियोथैरेपी हो रही है। उसकी टांगे घुटनों से सीधी नहीं होती थी, अब वह बिल्कुल सीधी हो गई है। मेरा बेटा अब अपने पांव पर खड़ा भी होने लग गया है। यह सब गुरुदेव की विशेष कृपा का फल है। मैं गुरुजी और गुरुमां को शत-शत नमन करती हूं। परविंदर कौर, जालंधर, पंजाब

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आयुर्विज्ञान के रहस्य

“आयुर्विज्ञान के रहस्य” कार्यक्रम की शुरुवात सन 2002 में आस्था चैनल पर की गई, इस प्रोग्राम पर परम पूज्य गुरुदेव महाब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी/Mahabrahmrishi Kumar Swami Ji ने चित्र व कुंडली देखकर रोग व उनका निदान बताकर हम सभी को कृपा प्रदान की। इस प्रोग्राम के कुछ अंश YouTube चैनल @Ayurvigyan पर प्रसारित किए जा रहे हैं जिनमे कठिन समस्याओं के सहज उपाय बताए गए हैं। इन्हे अपनी जीवन शैली में लाकर हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। जीवन में तन, मन और धन से सम्बंधित परेशानियों का मूल कारण गृह दोष, पितृ दोष, हमारे कर्म, अव्यवस्थित जीवन शैली, विरुद्ध आहार, भोजन में व घर/ऑफिस में स्वच्छता का अभाव व अन्य कई कारण हैं जिनका ज्ञान न होने के कारण हम अपने जीवन में अनेक दुखों को आमंत्रित कर लेते हैं। इस प्रोग्राम के माध्यम से सुखी गृहस्थ जीवन की कुंजियाँ, विद्यार्थियों के लिए विद्या अध्ययन के सहज उपाय, जीवन में सहजता से धन प्राप्ति के उपाय बताए गए हैं। गंभीर बीमारियां जैसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy),पीलिया (Jaundice), आर्थराइटिस (Arthritis ), माइग्रेन (Migraine), साइनोसाइटिस (Sinusitis), डायबिटीज(Diabetes) आदि बिमारियों के सहज समाधान बताए गए हैं। प्रोग्राम में पूज्य गुरुदेवजी ने अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को वर्णन किया है जिन्हे न समझने के कारण ही हमारे जीवन में समस्याएं आती हैं। गुरु कृपा को पाकर आप अपने जीवन को सुखमय बनाए।

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